Wednesday, 22 September 2010

वादल़ा घहर घहर घहराय रे

वादल़ा घहर घहर घहराय रे
वादला घहर घहर घहराय रे
सजन मन की वात करो
जिव म्हारो तुमरा बिना कंदराय रे
सजन मन मs उजास भरो

बिरथा गयो चार मईना को गाल़ो
प्रेमी नs का मन मs जड़ी दयो थो ताल़ो
कसो रे कट्यो राम दुस्मन उन्हाल़ो
अवं तो हुयो सबका हिरदा उजाल़ो
चुनरी फहर फहर फहराय रे
सजन वोकी गांठ धरो.वादल़ा घहर घहर......

हाथ नss मयंदी सी रच्यो रे रचावणु
पाय नss म्हावर सी मांड्यो रे मंडावणु
चिड़्या चिड़ई नs को धुल़ा माटी मs न्हावणु
असा भिग्या मौसम मs तुमरो सतावणु
डेडरा टरर टरर टर्राए रे
सजन मन को ताप हरो....वादल़ा घहर घहर.......

नद्दी नाल़ा देखो कसा उफणाया
सागर सी मिलणs का सपना सजाया
धरती मs प्रीत का कोंपल आया
पिया तुम आया न हिरदा लगाया
तन मन सिहर सिहर सिहराय रे
सजन सोंधी सांस भरो....वादल़ा घहर घहर घहराय रे.........
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                                                     सुरेश कुशवाहा तन्मय
                         03, लवकुश नगर, अवधपुरी
    कालीबाड़ी रोड़, पिपलानी,
      भेल-भोपाल 21 
       E Mail :- sureshnimadi@gmail.com
                                                               










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